न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा नकदी विवाद: जांच रिपोर्ट, महाभियोग प्रस्ताव और आत्मरक्षा के तीन अवसर

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा नकदी विवाद: जांच रिपोर्ट, महाभियोग प्रस्ताव और आत्मरक्षा के तीन अवसर

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में मार्च 2025 में बड़ी मात्रा में ₹500 के अधजले नोट मिलने के बाद पूरा न्यायिक तंत्र इस विवाद से हिल गया है। आग लगने की इस घटना के बाद न्यायमूर्ति वर्मा ने किसी भी अवैध नकदी से पल्ला झाड़ लिया, लेकिन सुप्रीम […]

7 जुलाई 2025

विधि-विशेष

सजा में दया याचिका पर रोक लगाने का अधिकार केवल उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय को – सत्र न्यायालय द्वारा 20 वर्षों तक दया से वंचित रखने का आदेश अमान्य

सजा में दया याचिका पर रोक लगाने का अधिकार केवल उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय को – सत्र न्यायालय द्वारा 20 वर्षों तक दया से वंचित रखने का आदेश अमान्य

मामला और संदर्भ Ravinder Singh बनाम राज्य सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, (2024) 2 SCC 323 उठाया गया मुख्य संवैधानिक/विधिक प्रश्न क्या किसी अपर सत्र न्यायालय (Additional Sessions Judge) के पास यह अधिकार है कि वह दया याचिका या क्षमादान (clemency) की प्रक्रिया पर यह प्रतिबंध लगा सके कि आरोपी को कम से कम 20 […]

7 जुलाई 2025

विधिक-समाचार

वाद में पक्षकार और साक्षी में कोई विधिक अंतर नहीं – जिरह के लिए पक्षकार द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत करना विधिसम्मत

वाद में पक्षकार और साक्षी में कोई विधिक अंतर नहीं – जिरह के लिए पक्षकार द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत करना विधिसम्मत

मामला और संदर्भMohammed Abdul Wahid बनाम निलोफ़र एवं अन्य, (2024) 2 SCC 144 उठाया गया मुख्य संवैधानिक/विधिक प्रश्न(1) क्या सिविल प्रक्रिया संहिता में “वाद का पक्षकार” (party to a suit) और “साक्षी” (witness) में कोई भिन्नता है?(2) क्या “वादी या प्रतिवादी का साक्षी” जैसी शब्दावली यह संकेत देती है कि वादी या प्रतिवादी जब स्वयं […]

7 जुलाई 2025

मामले-एवं-विश्लेषण

मध्यस्थ निर्णय रद्द होने पर भिन्नमत निर्णय (Dissenting Opinion) को पुरस्कार (Award) नहीं माना जा सकता

मध्यस्थ निर्णय रद्द होने पर भिन्नमत निर्णय (Dissenting Opinion) को पुरस्कार (Award) नहीं माना जा सकता

मामला और संदर्भHindustan Construction Co. Ltd. बनाम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), (2024) 2 SCC 613 उठाया गया मुख्य संवैधानिक/विधिक प्रश्नक्या मध्यस्थ पंचाट (Arbitral Tribunal) में किसी एक पंच द्वारा दिए गए भिन्नमत निर्णय (dissenting opinion) को, धारा 34 के अंतर्गत बहुमत के निर्णय (majority award) के रद्द होने की स्थिति में, स्वतः ही वैध […]

7 जुलाई 2025

पॉडकास्ट

निर्णायक सीमाएं: मध्यस्थीय निर्णय में तथ्यों का पुनर्मूल्यांकन नहीं किया जा सकता

निर्णायक सीमाएं: मध्यस्थीय निर्णय में तथ्यों का पुनर्मूल्यांकन नहीं किया जा सकता

मामला और संदर्भReliance Infrastructure Ltd. v. State of Goa, (2024) 1 SCC 479 उठाया गया मुख्य संवैधानिक/विधिक प्रश्नक्या मध्यस्थता अधिनियम, 1996 की धारा 34 के अंतर्गत न्यायालय को तथ्यों के पुनः मूल्यांकन का अधिकार है या नहीं? और क्या “patent illegality” के आधार पर निर्णय को चुनौती दी जा सकती है जब वह भारतीय विधि […]

7 जुलाई 2025

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अंतर्राष्ट्रीय-कानून

विश्व बैंक समूह ने निजी निवेश और रोजगार सृजन के लिए प्राइवेट सेक्टर इन्वेस्टमेंट लैब के नए चरण की शुरुआत

विश्व बैंक समूह ने निजी निवेश और रोजगार सृजन के लिए प्राइवेट सेक्टर इन्वेस्टमेंट लैब के नए चरण की शुरुआत

विश्व बैंक समूह ने 23 अप्रैल 2025 को अपनी “प्राइवेट सेक्टर इन्वेस्टमेंट लैब” के अगले चरण की शुरुआत की, जिसमें सदस्यता का विस्तार करते हुए नौकरियों के सृजन पर केंद्रित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य विकासशील देशों में निजी निवेश को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर सृजित करना है।​ विश्व बैंक के […]

27 अप्रैल 2025

न्यायिक-निर्णय

High Court Bar Association, Allahabad v. State of UP and Ors., [2024 (3) ADJ 295 (SC)]संविधान पीठ का निर्णय

High Court Bar Association, Allahabad v. State of UP and Ors., [2024 (3) ADJ 295 (SC)]संविधान पीठ का निर्णय

मुख्य प्रश्न क्या उच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम स्थगन आदेश (stay orders) केवल समयावधि के समाप्त हो जाने से स्वतः समाप्त (automatic vacation) हो सकते हैं? संविधानिक धाराएँ सुप्रीम कोर्ट का निर्णय (संविधान पीठ) न्यायालय का निष्कर्ष यह निर्णय न्यायिक स्वतंत्रता, न्यायालयीय अनुशासन, तथा न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण […]

7 जुलाई 2025

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अधिवक्ता-एवं-बार-काउंसिल

इलाहाबाद हाईकोर्ट का विवादित बयान: “पीड़िता ने खुद बुलाई मुसीबत”, आरोपी को दी गई जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट का विवादित बयान: “पीड़िता ने खुद बुलाई मुसीबत”, आरोपी को दी गई जमानत

प्रयागराज स्थित इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक बलात्कार के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए ऐसा बयान दिया है, जो सार्वजनिक और कानूनी हलकों में बहस का विषय बन गया है। अपने आदेश में न्यायालय ने कहा कि पीड़िता, जो एक शिक्षित युवती है, ने अपने व्यवहार और निर्णयों से स्वयं […]

13 अप्रैल 2025

न्यायिक-प्रक्रिया

आदेश 47 सीपीसी के तहत पुनर्विचार याचिका की सीमाएँ और आधार – स्पष्ट त्रुटि के बिना पुनः विचार अस्वीकार्य

आदेश 47 सीपीसी के तहत पुनर्विचार याचिका की सीमाएँ और आधार – स्पष्ट त्रुटि के बिना पुनः विचार अस्वीकार्य

मामला और संदर्भSanjay Kumar Agarwal बनाम State Tax Officer, (2024) 2 SCC 362 उठाया गया मुख्य संवैधानिक/विधिक प्रश्नक्या कोई निर्णय केवल इसलिए पुनर्विचार हेतु खोला जा सकता है क्योंकि याचिकाकर्ता उससे असहमत है? आदेश 47 नियम 1 सीपीसी के तहत पुनर्विचार किन सीमाओं और आधारों पर किया जा सकता है? न्यायालय का निर्णय और विधिक […]

7 जुलाई 2025

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